बालक बालिकाओं की संपूर्ण सर्वांगीण विकास हेतु शिक्षा का महत्व


शैक्षणिक विकास के संबंध में हम बात करें तो सबसे महत्वपूर्ण यह होता है कि बालक बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के लिए  सर्वप्रथम शिक्षा का विकास होना अति आवश्यक है

                     शिक्षा ही  एक  केंद्र बिंदु है जिसके तहत ही बालक बालिकाओं तथा संपूर्ण मानव जाति का चौमुखी विकास हो सकता है शिक्षा के बिना मानव जाति का कल्याण एवं उत्थान की कल्पना करना भी अधूरा साबित हो सकता है
                 
      आज हम आपको बालक बालिकाओं में शैक्षणिक विकास के तहत कुछ जानकारियां प्राप्त कराने की कोशिश करेंगे जिसे फॉलो करके आप अपने बच्चों के शैक्षणिक विकास तथा चौमुखी विकास करने में सक्षम बन जाएंगे
               
 इसे हम निम्नलिखित बिंदुओं के आधार के हिसाब से हम समझेंगे:-
  * बालक बालिकाओं एवं पालक का आपसी संबंध:–  शिक्षा के विकास एवं विस्तार में पलकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होता है पालक ही अपने बालक की शैक्षिक विकास को  सुदृष्टि कोचर कर सकता है इसके लिए महत्वपूर्ण होगा कि वह अपने बालक बालिकाओं के साथ अपने संबंध को बहुत ही मजबूत  बनाकर  रखें और आत्मीयता के साथ चलें
   *  पालक एवं बालक बालिकाओं का मित्रवत संबंध:- शैक्षणिक विकास हेतु   पा  लको ko चाहिए कि वह बच्चों के साथ friendly relation रखे 
    * बच्चों के मनोभाव को समझना:- सभी पाल कों  को ऐसा बनना होगा जिससे वे अपने बच्चों के मनोभाव को अच्छी से भलीभांति समझ सके और उसके अनु रूप अपने बच्चों को ढाल सके
* बच्चों के प्रति पालको का स्वभाव:- बच्चों के सर्वांगीण विकास एवं शैक्षणिक विकास हेतु सबसे महत्वपूर्ण यह है कि बालकों का स्वभाव बच्चों के प्रति कैसा है क्योंकि ज्यादातर यह देखा जाता है कि जैसे पालक का स्वभाव होता है वैसे बच्चे का स्वभाव  बनते हुए दिखाई पड़ता है इसके लिए महत्वपूर्ण होगा कि पालक जैसा अपने बच्चों को बनाना चाहेंगे वह सब बन जाएंगे  यह सब उनके हाथों पर निर्भर करेगा
* दायित्वों को समझना:- बच्चों में शैक्षणिक विकास हेतु पा लकों को चाहिए को सबसे पहले अपने दायित्वों को समझे और यहां बालक बालिकाओं को भी अपने दायित्व को समझ कर कार्य करने की अति आवश्यक है क्योंकि शिक्षा में पा लकों का साथ मिलने के बावजूद भी कई बच्चे शिक्षा से वंचित हो जाते हैं  ऐसे में महत्वपूर्ण होता है कि बच्चे अपने दायित्व को भलीभांति नहीं समझ पाते उन्हें समझ की आवश्यकता है
* बच्चों का आचरण:– शैक्षणिक विकास एवं शिक्षा में सुधार हेतु बच्चों का आचरण महत्वपूर्ण होता है क्योंकि किसी भी चीज को  बच्चे सीखना  ना चाहे  तो उसे किसी भी हालात में से सिखा नहीं सकते
* शैक्षिक गतिविधियों की जानकारी:- बालक बालिकाओं के शैक्षणिक विकास के लिए शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी होना अति आवश्यक है क्योंकि संपूर्ण गतिविधियों को जानने के पश्चात ही हम शिक्षा में सुधार एवं विस्तार कर सकते हैं
   सारांश:– यह तो थी दोस्तों आप सभी के बीच बालक बालिकाओं एवं पालक ओं का संबंध जिससे कि शैक्षणिक सुधार हो सके और शैक्षणिक नहीं अपितु चहुमुखी विकास हो सके बालकों के संबंध में मेरा यह मानना है कि सभी एक साथ मिलकर अपने समाज और अपने दायित्वों को पूर्ण करते हुए शिक्षा कों पूरे समाज में पूरे भारतवर्ष में अब पूरे मानव जाति में व्याप्त करें जिससे संपूर्ण मानव जाति का सर्वांगीण विकास एवं चहुमुखी विकास हो सके
    नोट:- दोस्तों यह जानकारी आप सभी को अच्छा लगे तो प्लीज हमारे लिए साइड में जाकर सर्च अवश्य करें हम आप सभी को ऐसे ही महत्वपूर्ण जानकारियों के साथ अवगत कराते रहेंगे

Leave a Comment

%d bloggers like this: